​मची खलबली! OpenAI और Google के 1,100 वैज्ञानिकों ने ही बजाया AI के खिलाफ बिगुल, कहा— तुरंत लगाओ ब्रेक वरना

RAJENDRA GEHLOT

AI की तेज रफ्तार पर रोक लगाने की मांग: OpenAI, Google और Anthropic के 1,100 विशेषज्ञों ने अमेरिकी सरकार को लिखा खुला पत्र

वाशिंगटन: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्षेत्र की अग्रणी कंपनियों के 1,100 से अधिक कर्मचारियों और पूर्व शोधकर्ताओं ने अमेरिकी सरकार को एक खुला पत्र भेजकर AI तकनीक के विकास की गति पर तुरंत नियंत्रण लगाने की मांग की है। विशेषज्ञों का कहना है कि सुरक्षा नियमों को लागू करने की तुलना में तकनीक बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है, जिससे बड़ा जोखिम पैदा हो गया है।

उद्योग के भीतर से उठी नियंत्रण की आवाज

यह पत्र OpenAI, Anthropic और Google DeepMind जैसी दिग्गज टेक कंपनियों के मौजूदा और पूर्व वैज्ञानिकों द्वारा संयुक्त रूप से जारी किया गया है। पत्र में चेतावनी दी गई है कि AI मॉडल की क्षमताएं हर कुछ महीनों में तेजी से बदल रही हैं, जबकि उनके संभावित खतरों का आकलन करने और सुरक्षा मानक तय करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा है।

हस्ताक्षरकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि वे तकनीक के विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन सुरक्षा मानकों को मजबूत किए बिना बिना ब्रेक की यह दौड़ समाज के लिए असुरक्षित साबित हो सकती है।

नियामक एजेंसियां पीछे, तकनीक की रफ्तार तेज

रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी नीतियां और नियामक तंत्र जिस गति से काम करते हैं, AI की प्रगति उससे कहीं अधिक तेज है। नए और अधिक शक्तिशाली मॉडलों को बाजार में उतारने की होड़ में कंपनियां सुरक्षा जांच प्रक्रियाओं को नजरअंदाज कर रही हैं या उनके पास पूरी जांच का समय ही नहीं बच रहा है।

शोधकर्ताओं के अनुसार, जब तक किसी वर्तमान मॉडल के साइबर सुरक्षा खतरों या समाज पर पड़ने वाले प्रभावों का ठीक से विश्लेषण होता है, तब तक उससे भी अधिक उन्नत मॉडल लॉन्च कर दिया जाता है। इस अंतर को मिटाने के लिए ही विकास की गति पर आंशिक रोक लगाने की मांग की गई है।

खुले पत्र में दर्ज प्रमुख चिंताएं और संभावित खतरे

अमेरिकी सरकार को भेजे गए इस पत्र में शोधकर्ताओं ने कई गंभीर तकनीकी और सामाजिक जोखिमों को रेखांकित किया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि AI की अनियंत्रित प्रगति से केवल नौकरियां ही खतरे में नहीं हैं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर भी सीधा असर पड़ रहा है।

विशेषज्ञों ने मुख्य रूप से तीन बड़े खतरों पर ध्यान आकर्षित किया है:

  • डीपफेक और भ्रामक जानकारी: चुनावों और सामाजिक शांति को प्रभावित करने वाले फर्जी ऑडियो-वीडियो कंटेंट में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हो रही है।
  • साइबर सुरक्षा सेंध: उन्नत AI मॉडल का इस्तेमाल हैकर्स द्वारा जटिल साइबर हमले डिजाइन करने और सुरक्षा प्रणालियों को तोड़ने के लिए किया जा सकता है।
  • नियंत्रण का नुकसान: जैसे-जैसे मॉडल अधिक स्वायत्त (autonomous) हो रहे हैं, वे मानवीय हस्तक्षेप के बिना फैसले लेने में सक्षम होते जा रहे हैं।

कंपनियों की अंदरूनी प्रतिस्पर्धा और दबाव

पत्र में इस बात का भी खुलासा किया गया है कि टेक कंपनियों के बीच बाजार में बढ़त बनाए रखने की होड़ इतनी तीव्र है कि सुरक्षा टीमों की चेतावनियों को अक्सर दबा दिया जाता है। डेवलपर्स पर नए फीचर्स जल्द से जल्द रोलआउट करने का भारी दबाव रहता है।

कई पूर्व कर्मचारियों ने दावा किया कि कंपनियों के भीतर सुरक्षा परीक्षणों को केवल एक औपचारिक प्रक्रिया मान लिया गया है। व्यापारिक लाभ की दौड़ में नैतिक सिद्धांतों और दीर्घकालिक सुरक्षा चिंताओं को दरकिनार किया जा रहा है, जिससे वैश्विक स्तर पर एक गैर-जिम्मेदाराना माहौल बन रहा है।

वैश्विक स्तर पर कड़े कड़े कानूनों की आवश्यकता

पत्र जारी करने वाले वैज्ञानिकों ने अमेरिका समेत दुनिया भर के नीति निर्माताओं से अपील की है कि वे AI कंपनियों पर स्वतंत्र ऑडिट और सुरक्षा जांच को अनिवार्य बनाएं। उनका मानना है कि जब तक सरकारें सख्त कानूनी ढांचा तैयार नहीं करतीं, तब तक कंपनियां केवल अपने वादों के भरोसे जिम्मेदारी से काम नहीं करेंगी।

प्रस्तावित सुझावों में AI मॉडलों के रिलीज से पहले तीसरे पक्ष द्वारा जोखिम मूल्यांकन, डेटा पारदर्शिता और स्वायत्त प्रणालियों पर इंसानी निगरानी का अनिवार्य प्रावधान शामिल है। कई यूरोपीय देश पहले ही AI एक्ट के जरिए इस दिशा में कदम उठा चुके हैं, जिसके बाद अब अमेरिका पर भी विधायी दबाव बढ़ गया है।

उद्योग जगत की प्रतिक्रिया और आगे का रास्ता

टेक दिग्गजों की ओर से इस पत्र पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं आई हैं। कुछ कंपनियों का दावा है कि वे पहले से ही जिम्मेदार AI विकास के सिद्धांतों का पालन कर रही हैं और अपनी सुरक्षा टीमों का विस्तार कर रही हैं। हालांकि, पत्र पर दस्तखत करने वाले विशेषज्ञों का तर्क है कि स्व-विनियमन (self-regulation) कभी पर्याप्त नहीं हो सकता।

सुरक्षा विशेषज्ञों और सरकारों के बीच संतुलन बनाने की यह कोशिश आने वाले दिनों में टेक उद्योग की दिशा तय करेगी। तकनीक की रफ्तार और जनसुरक्षा के बीच सही तालमेल बैठाना ही एकमात्र रास्ता है ताकि यह शक्तिशाली माध्यम मानवता के लिए खतरा न बनकर मददगार बना रहे।

Tags

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!