दुनिया के सबसे पहले 10 एआई टूल कौन-कौन से थे?
भूमिका: एआई की शुरुआत आखिर हुई कैसे?
आज हम जिस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल कर रहे हैं, वह बेहद एडवांस है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसकी शुरुआत कहाँ से हुई? दुनिया के पहले एआई टूल दिखने में आज के टूल्स जैसे स्मार्ट नहीं थे, लेकिन उन्होंने भविष्य की तकनीक की नींव रखी।
1960 और 1970 के दशक में वैज्ञानिकों ने ऐसे कंप्यूटर प्रोग्राम बनाने शुरू किए जो इंसानों की तरह सोचने या जवाब देने की कोशिश करते थे। उसी दौर में कुछ ऐसे टूल बने जिन्हें आज हम शुरुआती AI टूल्स के रूप में जानते हैं।
इस आर्टिकल में हम दुनिया के पहले 10 एआई टूल्स के बारे में जानेंगे, लेकिन जैसा तय हुआ है, हम इसे चार भागों में समझेंगे। इस पहले भाग में हम तीन शुरुआती एआई टूल्स के बारे में विस्तार से जानेंगे।
1. ELIZA (1966) – पहला चैटबॉट जैसा एआई
ELIZA को 1966 में MIT के वैज्ञानिक जोसेफ वाइज़ेनबाम ने बनाया था। यह दुनिया के सबसे पहले चैटबॉट जैसे एआई प्रोग्राम्स में से एक था।
ELIZA इंसानों से टेक्स्ट के माध्यम से बातचीत कर सकती थी। यह असली समझ नहीं रखती थी, बल्कि यूज़र के वाक्य को दोहराकर या उसमें बदलाव करके जवाब देती थी।
ELIZA कैसे काम करती थी?
अगर कोई यूज़र लिखता: "मुझे दुख हो रहा है" तो ELIZA जवाब देती: "आपको क्यों दुख हो रहा है?"
यह केवल पैटर्न मैचिंग तकनीक पर काम करती थी, लेकिन उस समय के लिए यह बेहद चौंकाने वाली तकनीक थी।
यह क्यों महत्वपूर्ण थी?
- इसने इंसान और मशीन के बीच संवाद की शुरुआत की।
- यह पहला कदम था चैटबॉट टेक्नोलॉजी की दिशा में।
- इसने यह दिखाया कि कंप्यूटर इंसानी बातचीत की नकल कर सकते हैं।
2. SHRDLU (1970) – भाषा समझने वाला शुरुआती एआई
1970 में टेरी विनोग्राड नाम के शोधकर्ता ने SHRDLU नाम का एआई सिस्टम बनाया। यह सिस्टम साधारण भाषा को समझ सकता था।
SHRDLU एक वर्चुअल ब्लॉक वर्ल्ड में काम करता था। यूज़र उससे लिखकर कह सकता था: "लाल ब्लॉक को नीले ब्लॉक के ऊपर रखो" और सिस्टम उस कमांड को समझकर काम कर देता था।
SHRDLU की खासियत
- यह निर्देशों को समझ सकता था।
- यह सवालों के जवाब दे सकता था।
- यह सीमित लेकिन वास्तविक समझ दिखाता था।
हालांकि यह केवल एक छोटे से वर्चुअल वातावरण तक सीमित था, लेकिन इसने नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP) के क्षेत्र में बड़ा योगदान दिया।
3. MYCIN (1972) – मेडिकल एआई की शुरुआत
1972 में MYCIN नाम का एआई सिस्टम विकसित किया गया। इसका उद्देश्य था डॉक्टरों की मदद करना।
MYCIN मरीजों के लक्षणों के आधार पर बैक्टीरियल इंफेक्शन का अनुमान लगा सकता था और एंटीबायोटिक की सलाह दे सकता था।
MYCIN कैसे काम करता था?
यह "रूल-बेस्ड सिस्टम" पर आधारित था। इसमें सैकड़ों नियम (IF-THEN नियम) डाले गए थे।
उदाहरण: अगर मरीज को बुखार है और खून की रिपोर्ट में खास बैक्टीरिया दिखता है तो यह दवा सुझाई जा सकती है।
यह क्यों ऐतिहासिक था?
- यह हेल्थकेयर में एआई का शुरुआती प्रयोग था।
- इसकी सटीकता कई बार डॉक्टरों के बराबर थी।
- इसने एक्सपर्ट सिस्टम्स की नींव रखी।
अब तक हमने तीन शुरुआती एआई टूल्स — ELIZA, SHRDLU और MYCIN — के बारे में जाना। इन टूल्स ने यह साबित कर दिया था कि कंप्यूटर केवल गणना करने वाली मशीन नहीं है, बल्कि वह इंसानी भाषा समझने और निर्णय लेने की दिशा में भी आगे बढ़ सकता है।
अब इस दूसरे भाग में हम तीन और महत्वपूर्ण शुरुआती एआई सिस्टम्स के बारे में जानेंगे, जिन्होंने इंडस्ट्री, विज्ञान और कंप्यूटर विज़न के क्षेत्र में नई क्रांति की शुरुआत की।
4. DENDRAL (1965–1970) – वैज्ञानिक खोज में एआई
DENDRAL दुनिया के पहले सफल एक्सपर्ट सिस्टम्स में से एक था। इसे 1960 के दशक में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने विकसित किया।
इसका मुख्य उद्देश्य था रसायन विज्ञान (Chemistry) में मदद करना। यह अज्ञात रासायनिक यौगिकों की संरचना का अनुमान लगाने में वैज्ञानिकों की सहायता करता था।
DENDRAL कैसे काम करता था?
यह भी एक रूल-बेस्ड सिस्टम था, लेकिन MYCIN की तुलना में अधिक जटिल। इसमें वैज्ञानिक नियम और केमिकल डेटा डाला गया था, जिसके आधार पर यह संभावित संरचना सुझाता था।
यह क्यों महत्वपूर्ण था?
- यह पहला एआई सिस्टम था जिसने वास्तविक वैज्ञानिक शोध में मदद की।
- इसने दिखाया कि एआई केवल प्रयोगशाला की चीज़ नहीं, बल्कि व्यावहारिक उपयोग में भी आ सकता है।
- इसने भविष्य के एक्सपर्ट सिस्टम्स के लिए रास्ता तैयार किया।
5. PROLOG (1972) – लॉजिक प्रोग्रामिंग की नींव
PROLOG पारंपरिक अर्थों में कोई ऐप या सॉफ्टवेयर टूल नहीं था, बल्कि एक प्रोग्रामिंग भाषा थी जो विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए बनाई गई थी।
इसे 1972 में फ्रांस में विकसित किया गया था। PROLOG का पूरा फोकस था "लॉजिक" यानी तर्क के आधार पर समस्या हल करना।
PROLOG की खास बात
- यह तथ्य (Facts) और नियम (Rules) के आधार पर काम करता था।
- यह सवाल पूछकर निष्कर्ष निकाल सकता था।
- यह एआई रिसर्च में बहुत लोकप्रिय हुआ।
आज भी कई एआई सिस्टम्स की जड़ें लॉजिक प्रोग्रामिंग में मिलती हैं, और PROLOG को इस दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जाता है।
6. Stanford Cart (1961–1980) – रोबोटिक्स में एआई की शुरुआत
Stanford Cart एक रोबोटिक वाहन था जिसे स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में विकसित किया गया। यह अपने आसपास के वातावरण को समझकर रास्ता तय कर सकता था।
आज के स्वचालित (Self-Driving) वाहनों की तुलना में यह बहुत धीमा और सीमित था, लेकिन उस समय के लिए यह अद्भुत उपलब्धि थी।
Stanford Cart क्या कर सकता था?
- कैमरे की मदद से बाधाओं को पहचानना
- धीरे-धीरे रास्ता तय करना
- बिना इंसानी हस्तक्षेप के नेविगेट करना
यह एआई और रोबोटिक्स के मेल का शुरुआती उदाहरण था। इसने दिखाया कि मशीन केवल सोच ही नहीं सकती, बल्कि वास्तविक दुनिया में निर्णय लेकर कार्य भी कर सकती है।
7. XCON (1980) – इंडस्ट्री में एआई की एंट्री
XCON (जिसे R1 भी कहा जाता था) 1980 के आसपास Digital Equipment Corporation द्वारा विकसित किया गया था। यह एक एक्सपर्ट सिस्टम था जिसका काम था कंप्यूटर सिस्टम्स को ऑटोमैटिक तरीके से कॉन्फ़िगर करना।
उस समय बड़े कंप्यूटर सिस्टम्स को सेटअप करना बेहद जटिल काम था। XCON ग्राहकों की जरूरत के अनुसार सही हार्डवेयर पार्ट्स और सेटिंग्स चुन सकता था।
XCON की खासियत
- हजारों नियमों के आधार पर निर्णय लेना
- मानवीय गलतियों को कम करना
- कंपनियों का समय और पैसा बचाना
यह उन शुरुआती एआई सिस्टम्स में से था जिसने व्यावसायिक दुनिया में वास्तविक लाभ दिया।
8. NETtalk (1987) – मशीन लर्निंग की शुरुआती झलक
NETtalk 1987 में विकसित एक न्यूरल नेटवर्क आधारित सिस्टम था। यह लिखे हुए अंग्रेज़ी शब्दों को पढ़कर सही उच्चारण करना सीख सकता था।
सबसे दिलचस्प बात यह थी कि इसे पहले से सारे नियम नहीं दिए गए थे। यह उदाहरणों से सीखता था — यानी मशीन लर्निंग का शुरुआती रूप।
यह कैसे काम करता था?
- इसे शब्द और उनके उच्चारण दिए गए
- यह बार-बार अभ्यास करके पैटर्न पहचानता था
- धीरे-धीरे यह नए शब्दों का भी उच्चारण करने लगा
आज के डीप लर्निंग मॉडल्स की नींव ऐसे ही प्रयोगों से पड़ी।
9. Deep Blue (1997) – एआई बनाम इंसान
Deep Blue IBM द्वारा बनाया गया एक सुपरकंप्यूटर था। इसका मुख्य उद्देश्य था शतरंज खेलना — और वह भी विश्व स्तर के खिलाड़ियों के खिलाफ।
1997 में Deep Blue ने विश्व शतरंज चैंपियन गैरी कास्पारोव को हराया। यह घटना एआई इतिहास की सबसे चर्चित घटनाओं में से एक बन गई।
Deep Blue क्यों ऐतिहासिक था?
- पहली बार किसी कंप्यूटर ने विश्व चैंपियन को हराया
- इसने एआई की गणनात्मक शक्ति को दुनिया के सामने साबित किया
- यह मशीन इंटेलिजेंस की सार्वजनिक पहचान का बड़ा क्षण था
हालांकि Deep Blue मानव की तरह "सोचता" नहीं था, लेकिन उसकी प्रोसेसिंग क्षमता और एल्गोरिद्म बेहद शक्तिशाली थे।
10. IBM Watson (2011) – आधुनिक एआई की मजबूत नींव
IBM Watson को 2011 में विकसित किया गया था। यह एक प्रश्न-उत्तर आधारित एआई सिस्टम था जो प्राकृतिक भाषा को समझ सकता था और जटिल सवालों के सटीक जवाब दे सकता था।
Watson तब चर्चा में आया जब उसने लोकप्रिय क्विज़ शो “Jeopardy!” में मानव चैंपियनों को हराया। यह उपलब्धि केवल तेज़ गणना की वजह से नहीं थी, बल्कि इसलिए भी थी क्योंकि Watson भाषा के अर्थ को समझकर जवाब ढूंढ सकता था।
Watson कैसे काम करता था?
- यह बड़ी मात्रा में डेटा को प्रोसेस करता था
- नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP) का उपयोग करता था
- मशीन लर्निंग एल्गोरिद्म से उत्तर की सटीकता का अनुमान लगाता था
Watson ने हेल्थकेयर, बैंकिंग और कस्टमर सपोर्ट जैसे क्षेत्रों में एआई के व्यावहारिक उपयोग को नई दिशा दी।
इन 10 टूल्स ने हमें क्या सिखाया?
अगर हम शुरुआत से अंत तक पूरी यात्रा को देखें, तो एक साफ़ पैटर्न दिखाई देता है:
- पहले एआई ने बातचीत की नकल की
- फिर उसने नियमों के आधार पर निर्णय लेना सीखा
- इसके बाद उसने सीखना शुरू किया
- और अंत में उसने भाषा समझकर उत्तर देना शुरू किया
इन दस टूल्स ने एआई को चार महत्वपूर्ण चरणों से गुजारा:
- साधारण पैटर्न पहचान
- रूल-बेस्ड निर्णय प्रणाली
- मशीन लर्निंग और न्यूरल नेटवर्क
- डेटा-ड्रिवन और भाषा समझने वाले सिस्टम
आज का एआई इनसे कितना अलग है?
आज का एआई — जैसे चैटबॉट्स, इमेज जनरेटर, और वॉयस असिस्टेंट — इन शुरुआती प्रयोगों की ही उन्नत रूपरेखा है।
फर्क सिर्फ इतना है कि:
- आज डेटा बहुत अधिक है
- कंप्यूटिंग पावर हजारों गुना बढ़ चुकी है
- एल्गोरिद्म अधिक परिष्कृत हो चुके हैं
लेकिन अगर ELIZA, MYCIN, DENDRAL या Deep Blue जैसे टूल्स न होते, तो आज का आधुनिक एआई भी शायद संभव नहीं होता।
दुनिया के पहले 10 एआई टूल्स ने केवल तकनीक नहीं बनाई, उन्होंने इंसान और मशीन के रिश्ते को बदल दिया।
शुरुआत एक साधारण टेक्स्ट चैट से हुई थी, और आज एआई इंसानों की तरह लेख लिख सकता है, चित्र बना सकता है और जटिल समस्याओं का समाधान दे सकता है।
यह यात्रा हमें यह सिखाती है कि हर बड़ी तकनीक की शुरुआत एक छोटे लेकिन साहसी प्रयोग से होती है।
और शायद भविष्य में, जब लोग आज के एआई को देखेंगे, तो वे भी इसे किसी नई और बड़ी क्रांति की शुरुआती सीढ़ी मानेंगे।

